हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ,
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ।
आरती उतारूँ, प्यारे तुमको मनाऊँ,
आरती उतारूँ, प्यारे तुमको मनाऊँ।
अवध-विराही, तेरी आरती उतारूँ,
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ॥
कनक सिंहासन, रजत जोड़ी,
कनक सिंहासन, रजत जोड़ी।
दशरथ नंदन, जनक किशोरी,
दशरथ नंदन, जनक किशोरी।
युगल छवि को सदा निहारूँ,
युगल छवि को सदा निहारूँ।
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ,
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ॥
वाम भाग शोभित जग जननी,
वाम भाग शोभित जग जननी।
चरण विराजत हैं सुत अंजनी,
चरण विराजत हैं सुत अंजनी।
उन चरणों को सदा पखारूँ,
उन चरणों को सदा पखारूँ।
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ,
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ॥
आरती हनुमंत के मन भाए,
आरती हनुमंत के मन भाए।
राम कथा नित शिव जी गाएँ,
राम कथा नित शिव जी गाएँ।
राम कथा हृदय में उतारूँ,
राम कथा हृदय में उतारूँ।
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ,
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ॥
चरणों से निकली गंगा प्यारी,
चरणों से निकली गंगा प्यारी।
वंदन करती दुनिया सारी,
वंदन करती दुनिया सारी।
उन चरणों में शीश झुकाऊँ,
उन चरणों में शीश झुकाऊँ।
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ,
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ॥
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ,
हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ॥
आरती का धार्मिक महत्त्व
‘हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ’ भगवान श्रीराम की भक्ति, श्रद्धा और समर्पण को व्यक्त करने वाली एक भक्तिपूर्ण आरती है। इसमें श्रीराम, माता सीता, भगवान शिव और श्री हनुमान के प्रति आदर तथा भक्ति का भाव दिखाई देता है।
- भगवान श्रीराम की स्तुति: आरती में श्रीराम को आदर्श, मर्यादा और धर्म के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है।
- श्रीराम और माता सीता का दिव्य स्वरूप: “दशरथ नंदन, जनक किशोरी” की पंक्ति श्रीराम और माता सीता के युगल स्वरूप के दर्शन तथा उनकी महिमा का वर्णन करती है।
- श्री हनुमान की अनन्य भक्ति: आरती में हनुमान जी का उल्लेख प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और प्रेम की याद दिलाता है।
- रामकथा के प्रति श्रद्धा: रामकथा को हृदय में उतारने का भाव भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।
- आत्मिक शांति और सकारात्मकता: श्रद्धापूर्वक आरती गाने से भक्तों को मानसिक शांति, एकाग्रता और आध्यात्मिक संतोष की अनुभूति हो सकती है।
इस आरती को मंदिर में पूजा के समय, घर की संध्या आरती, श्रीराम नवमी, राम विवाह उत्सव तथा अन्य श्रीराम भक्ति आयोजनों में गाया जा सकता है।
