
आरती गैया मैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की
आरती गैया मैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की
जहाँ से प्रकट हुई सृष्टि, करे नित पंच गव्य वृष्टि
सकल पर रखती सम दृष्टि, जीवन में रंग, जीने का ढंग
बताती बात बंधैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की
आरती गैया मैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की ॥ १ ॥
तुम्ही हो अमृत की नाभि, शमन करती हो विष का भी
तुम्ही माँ मूरत ममता की, तुम्हारी झलक रहे ना अलग
चले पथ नाग नथैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की ।
आरती गैया मैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की ॥ २ ॥
तुम्ही पर निर्भर है खेती, तुम्ही निर्बल को बल देती
नहीं बदले में कुछ लेती, तुम्हारा गव्य, बनावे भव्य
दिव्यता आवे हैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की ।
आरती गैया मैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की ॥ ३ ॥
तुम्ही से सुखी है ये धरती, सभी के दुखड़े तुम हरती ।
भागवत गान तुम ही करती, तुम्ही से संत, करे दुःख अंत।
भव से पार लगैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की ।
आरती गैया मैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की ॥ ४ ॥
“जय गौ माता-जय गोपाल”
गौ माता की आरती का महत्व | आरती गैया मैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की
॥ जय गौ माता – जय गोपाल ॥
गौ माता की आरती का महत्व
गौ माता को भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में माता के समान पूजनीय माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण का गौ माता से विशेष प्रेम रहा है। वे स्वयं गोपाल और गोविंद नाम से प्रसिद्ध हैं। गौ माता की सेवा करना, उन्हें श्रद्धा से प्रणाम करना और उनकी आरती करना सनातन परंपरा में पुण्य और भक्ति का कार्य माना जाता है।
“आरती गैया मैया की, दुलारी कृष्ण कन्हैया की” एक भावपूर्ण भक्ति आरती है, जिसमें गौ माता की ममता, दया, उपयोगिता और संसार के जीवन में उनके योगदान का सुंदर वर्णन किया गया है।
1. सृष्टि और जीवन में गौ माता का महत्व
आरती की पहली पंक्ति में गौ माता को भगवान श्रीकृष्ण की दुलारी बताया गया है। इसमें गौ माता के जीवनदायिनी स्वरूप और उनके प्रति श्रद्धा को प्रकट किया गया है। पंचगव्य का उल्लेख भारतीय धार्मिक परंपरा में गौ माता से प्राप्त पाँच पदार्थों के महत्व को दर्शाता है। यह पंक्ति हमें प्रकृति, जीव-जंतुओं और समस्त सृष्टि के प्रति सम्मान का भाव सिखाती है।
2. ममता, दया और करुणा की प्रतीक
गौ माता को ममता और वात्सल्य का प्रतीक माना गया है। जिस प्रकार माता अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार गौ माता भी अपने बछड़े की देखभाल करती है। आरती का यह भाव हमें सिखाता है कि हमें सभी जीवों के प्रति दया रखनी चाहिए और उनकी पीड़ा को समझना चाहिए।
3. कृषि और जनजीवन में योगदान
गौ माता का भारतीय ग्रामीण जीवन और कृषि में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। दूध से अनेक खाद्य पदार्थ बनते हैं और गोबर का उपयोग खाद तथा अन्य ग्रामीण कार्यों में किया जाता है। आरती की पंक्तियाँ हमें गौ माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाना सिखाती हैं।
4. सुख, सेवा और भक्ति का संदेश
आरती में गौ माता को धरती के सुख और मानव जीवन के कल्याण से जोड़ा गया है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में गौ सेवा का विशेष स्थान है। इसलिए गौ माता की आरती करना केवल पूजा का एक रूप नहीं, बल्कि सेवा, प्रेम, त्याग और करुणा जैसे गुणों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी है।
निष्कर्ष
गौ माता की यह आरती हमें याद दिलाती है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। गौ माता की सेवा करना, उन्हें प्रेम से भोजन देना, उनकी उचित देखभाल करना और सभी प्राणियों के प्रति दयालु रहना भी भक्ति का महत्वपूर्ण अंग है। आइए, भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करें कि वे सभी के जीवन में सुख, शांति और सद्भाव बनाए रखें तथा हमें गौ माता की सेवा और जीवों के प्रति करुणा का मार्ग अपनाने की शक्ति दें।
